Wednesday, February 29, 2012

bhor

भोर की वेला अदबुध होती है ,खुशनुमा और ताजगी भरी होती है
चिढ़ियो की चहचहाहट और फुदफुदाहट मन को मोह लेती है

नए दिन की नए शरुआत नए सपने सजोये मन झूम रहा होता है
जिंदगी कितनी खुबसूरत है ,हर रंग अपने आप में उमंग भर रहा होता है

ऐसा लगता है कि प्रकृति भी हमारे विचारो के संग झूम रही है
हवाहो कि थिरकन रह रह कर हमें इस का अहसास कराने में जुटी  है

क्यों न में नतमस्तक हु उस परवरदिगार का ,कि दिया है मुझे मोका इन ख़ुशी भरे लम्हों का

Thursday, February 23, 2012

mousam

बरसात की फुहारे रह रह कर तरोबर कर रही है इस बदन को
शायद यह कह रही है ,पुकार रही है मौसम की ताजगी को

इतरा रहे है फूल अपनी ताजगी पर ,कि ओंस ने किया है मिलन उस पर
कि और निखर आया है चेहरा इन सुगंध भरे गुलाबी पंखरियो  का

झूम रही है डालिया मस्त मस्त होकर कि उमंग है उनके हर रंग में
कि नज़ारे गढ़ी है अनेको अनेक उनके जिस्म के हर दमक पर

कि समां है सुहाना चारो और नब पर ,जल में और पूरी कायनात में
कि मोहब्बत चूम रही है ,कह रही है हर इक फ़साना घूम घूम कर

नाचे है धरती झूम झूम कर ,कर कर के इशारे सारी घटाओ को
कि बरसो जी भर के चूम चूम कर मेरे अंग अंग पर .