आज जिंदगी बहुत खुबसूरत लग रही है ,चारो और बहार ही बहार ही बहार है ,सुबह की वेल्ला बेहद आकर्षत और मन लुबावानी लग रही है ,सर्द हवाए अब नहीं लगती ,बसंत की भीनी भीनी खुशबु अब बागो में नज़र आने लगी है ,कोमल फूल अब खिलने लगे है नए पते भी सुन्दरता को चार चाँद लगा रहे है भवरे अब इर्द गिर्द घूम रहे है चुरियो की चहचहाहट मौसम को अपने आने की दस्तक दे रही है आसमान भी बदलो के साथ अपने होने का ऐलान कर रहा है ,क्यों नहीं कोही प्यार करे इस प्रकति के नयेपन से ,क्यों नहीं कोही थिरके मौसम के इस रंग को ,ईश्वर के इन्ही सुंदर रचनाओ को मष्तिक बार बार उनके चरणों में झुक जाता है और स्वत ही आवाज़ निकलती है वाह मालिक वाह तुम्हे कोटि कोटि धन्यवाद् .
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