Friday, August 6, 2010
peace
छः अगस्त को दुनिया के लोग नहीं भूल सकते है जब पहली बर परमाणु बम का इस्तेमाल क्या गया था जापान के हिरोशिमा शहर पर तब दुनिया दहल गई थी यह देख कर हजारो इन्सान मोत के शिकार हुवे थे और क्र्रोर्रो का नुकसान हुआ था और दो दिन बाद नव अगस्त को नागासाकी पर बम गिराए गए थे .यह सब दुसरे विशव युद्ध के बाद उनीस सो पेतालिस को हुआ था मानवता के इतहास में यह सब से बड़ा हादसा था जिससे मानव का सर शर्म से झुक गया था आज भी इस विभीषिका को याद कर मष्तिक में रोंगटे खर देता है इस हादसे एवम युद्ध के बाद एक विशव मंच बना कही देशो को मिला कर सयुक्त राष्ट्र संग बना ताकि आगे फिर कभी ऐसा न हो लेकिन अफ़सोस उसके बाद भी विशव में शांति न हुई विशव में कही जगह युद्ध हुवे जिसमे बढ़े देशो का बहुत दखल हुआ यह बहुत ही हेरानी कि बात है कि आज विशव के छ देशो मून परमाणु शास्त्र है जो मानव जाति के लिए घातक है अब सब देशो को मिल कर इसे सुल्जना चाहिए ताकि इन्सान के मन यह डर निकल गए कि उसके सर खतरा मंडरा रहा है और मानव अपने देश का सही विकास कर सके कियो कि इस पर हर देश के अरबो रुपैये खर्च होते है जो बिलकुल ही बेकार है शांति से बढ़ कर कोही चीज इस दुनिया में नहीं है बातचीत से ही दुनिया में झाग्र्रे हल होते है यह दुनिया बहुत ही सुंदर है ईश्वर ने हर वास्तु हमें इस संसार में दी है और हम है कि उसे देख नहीं रहे है और फालतू के झाग्र्रो में अपना समय बर्बाद कर रहे है अब हम सब देशो को मिल कर एक नया संग बनाना चाहिए जो केवल शांति के लिए सोचे और उसे सभी अधिकार दिए जाये जिससे केवल शांति और शांति मिल सके और हर देश उसके आदेशो का पालन करे कोई वीटो वगेरेह न हो सिर्फ मेजोरिटी के आधार पर फैसला हो तो देखो कितना न अच्छा रिजल्ट आएगा तब यह दुनिया स्वर्ग से काम नहीं होगी प्यार और प्यार चारो तरफ होगा शांति ही शांति हर और होगी येही हमारा इस दुनिया में आने का सदुपयोग है काश यह अति शीग्र हो जाये .
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