अजीब सा माहोल है इस लुटती हुई दुनिया में
हर इक शख्स जेबे भरने में लगा हुआ है
कहा ले जाएगा ,क्या करेगा ,नहीं खबर उसे
देख देख कर रोज़ खुश होता है इसे देख कर
लेकिन दे नहीं पाता किसी जरुरतमंद को कभी भी
मुस्कराता है हस्ता है इसे देख देख कर
पर नहीं करता खर्च अपने पर भी इक पल
और पत्ता चला इक दिन ,टूटती सांस इक पल
भिखर के रह गए दस्ते नोटों के
कि ले ग़ही सरकार अपने खजाने में
खामोश रह गही वो हसने कि जगह ,न नोट रहे ,न नोटों वाला
हर इक शख्स जेबे भरने में लगा हुआ है
कहा ले जाएगा ,क्या करेगा ,नहीं खबर उसे
देख देख कर रोज़ खुश होता है इसे देख कर
लेकिन दे नहीं पाता किसी जरुरतमंद को कभी भी
मुस्कराता है हस्ता है इसे देख देख कर
पर नहीं करता खर्च अपने पर भी इक पल
और पत्ता चला इक दिन ,टूटती सांस इक पल
भिखर के रह गए दस्ते नोटों के
कि ले ग़ही सरकार अपने खजाने में
खामोश रह गही वो हसने कि जगह ,न नोट रहे ,न नोटों वाला
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