कितना अजीब है ये इंसान मन में न जाने क्या क्या सपने संझोये हुए रहता है ,कि यह करूँगा ये न करूँगा ,ये बनुगा , वहां जाहुंगा ,अनेको अनेक ख्वाब वो अपने ह्रध्य में संझोये रहता है ,पर होता है क्या उसे खुद पता नहीं होता है ,कब ,कहा ,कैसे ,क्यों हो जाता है या गटित हो जाता है ,उसे पता ही नहीं चलता है ,यही जीवन कि सचाई है ,परन्तु यह भी सही है कि व्यक्ति ख्वाब देखे और उसे पूरा करने में अपनी जी जान लगा देवे ,बाकि सब उप्पेर वाले पर छोर देवे ,तो फिर कहना ही क्या ऐसी जिंदगी का ,बहार बहार चारो और हो जाती है ,जिंदगी के साथ हर पल खुशियों में व्यतीत हो जाता है ,हर ख्यर ईश्वर को धन्यवाद् देने में पीछे नहीं रहता है ,उफ़ और वाह मुह से हर पल जिंदगी को सार्थक बना देता है ,काश हर व्यक्ति इस तरह जीता और खुद खुश रहता और औरो को भी खुश रखता ,भगवन महावीर के ये अनोखे शब्द "जियो और जीने दो "
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